उज्जैन की अधोसंरचनात्मक विकास यात्रा

हर बड़े शहर की विकास गाथा की परिचायक हैं वहां की उंची-उंची गगनचुंबी और भव्य इमारतें। वहां की अधोसंरचनात्मक ईकाईयां, और विकास के निरंतर आगे बढ़ते सौपान। एक समय महाराज विक्रमादित्य की नगरी उज्जयिनी के चर्चे भारतवर्ष सहित अरब, ईरान, ईराक तक चर्चित थे। यहां के निर्माण और मंदिर स्थापत्य कला का लोहा बड़े बड़े विद्वान भी मानते थे। विश्व के मध्य में बसी कालगणना की नगरी उज्जयिनी जहां बारह वर्ष में सिंहस्थ यानि कुंभ का मेला इसे स्वर्ग में परिवर्तित करता है। उस नगरी में अंधोसंरचना का विकास नितांत आवश्यक है जिसे बरकरार रखने का बीड़ा उठाया डॉक्टर मोहन यादव ने।

उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, म.प्र. पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष और उज्जैन दक्षिण विधायक के बतौर डॉक्टर मोहन यादव ने उज्जैन में जो अधोसंरचनात्मक विकास का जाल फैलाया, वह आज देखते ही बनता है। महाकाल वाणिज्य का क्षेत्र जहां नीचे अपना व्यवसाय करने की सहूलियत के साथ उपरी तल पर रहने की सुविधा ने व्यापार को और इस क्षेत्र को आबाद किया है।

महानंदानगर की सुविकसित सब्जी मंडी की परिकल्पना को अमलीय जामा पहनाते हुए एक महत्वपूर्ण सौगात डॉ. मोहन यादव की इस क्षेत्र को मिली है।

कॉलोनियों का विकास, अवैध कॉलोनियों का नियमितिकरण, फ्रीगंज कट मार्ग का निर्माण, कम दर पर मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों को आवासीय सुविधा ने लोगों के जीवन को सुखद बनाया।
खिलाड़ियों के लिए महानंदानगर स्थित खेल प्रशाल में रेसिंग ट्रैक, स्वीमिंग पुल, खेल के मैदान सहित अन्य सुविधाओं का निर्माण आज डॉ. यादव की महत्वपूर्ण सौगात है। इतना ही नहीं नानाखेड़ा स्थित स्टेडियम की बहुप्रतिक्षित मांग को भी आपने पूरा किया।

कालगणना और ज्योतिष की केंद्र बिंदू उज्जैन नगरी के वसंत विहार में तारामंडल का निर्माण कर उसमें ब्रह्मांड के सिद्धांत का 3 डी शो शोधकर्ता, विद्यार्थियों और आमजन के लिए महत्वपूर्ण है।
इसी तरह डॉ. यादव द्वारा डोंगला में वैद्य शाला का निर्माण कर, जंतर मंतर वैद्यशाला के बाद एक और वैद्य शाला देकर भारतवर्ष पर अपने आप को अंकित किया है।

शोध और शिक्षा से संबंधित अन्य विकासात्मक अधोसंरचनाओं में प्रमुख सर्प उद्यान, विक्रमादित्य शोध पीठ संस्थान, त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन की सीमारेखा तक हाई स्कूलों का निर्माण, निजी एमआईटी ग्रुप को उज्जैन में लाकर स्थापित करवाने में डॉ. मोहन यादव ने अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन किया है।

डॉक्टर मोहन यादव के जीवन में धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कारों का गहरा प्रभाव है, और यही इनकी राजनीतिक सोच में भी परिलक्षित होता है। यही कारण है कि धार्मिक विकास के रुप में भी उज्जैन ने विकास की उंचाईयां छुई हैं। उज्जैन के सभी प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार, स्कॉन मंदिर स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका, महाकाल भस्मारती के दौरान भक्तों की सुविधा के लिए 2 हजार लोगों की क्षमता वाले हॉल का निर्माण, उज्जैन की चारों दिशाओं में विक्रमादित्य द्वार के माध्यम से भक्तों का स्वागत, उज्जैन रोड स्थित आकर्षक और कलात्मक महामृत्युंजय द्वार का निर्माण हासामपुरा तीर्थ आश्रम का निर्माण, रुद्र सागर में विक्रमादित्य के नवरत्न और 32 पुतलियों का निर्माण सहित अनगिनत निर्माणों की यह सूचि इसी तरह आगे बढ़ती रहती है।

उज्जैनवासियों को महानगरीय सुविधा प्राप्त हो इसे ध्यान में रखते हुए ट्रेजर आईलैंड जैसे मॉल को उज्जैन में लाने का श्रेय आपको ही जाता है। साथ ही उज्जयिनी होटल और क्षिप्रा होटल के सामने यात्रिका का उन्नयन कर शहर को अधोसंरचनात्मक धरोहरें देने का कार्य डॉ. मोहन यादव के खाते में जाता है।

सांस्कृतिक आयोजन हेतु कालिदास अकादमी में संकुल ऑडिटोरियम, विक्रम कीर्ति मंदिर का जीणोद्धार, ओपन ऑडिटोरियम, और शहर के सौंदर्यीकरण में लाल पत्थर के डिवाइडरों को लगाकर उज्जैन के सौंदर्य को निखारने का कार्य किया गया है।

नवीन जिला कोर्ट परिसर और जिलाधीश कार्यालय के निर्माण में अग्रणी भूमिका डॉ. मोहन यादव की ही रही है। सांवराखेड़ी ब्रिज का निर्माण कर कई किलोमीटर का रास्ता कम कर ग्रामीणों को सीधे शहर से जोड़ने की सूझबूझ और इच्छाशक्ति भरी पहल आपने स्वयं के पैसों से की है।

इंदौर-उज्जैन सड़क को फोरलेन कर परिवहन को सुगम बनाने और महानगर से उज्जैन की दूरी कम करने की अनुपम पहल करने के बाद डॉक्टर मोहन यादव द्वारा प्रत्येक गांव में सीमेंट कांक्रीट रोड़, दो राजमार्ग और दो फोरलेन मार्ग के निर्माण के कार्य को संपादित करवाना, नल जल योजना के माध्यम से हर ग्रामीण के घर पानी की आपूर्ति करना, नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना जैसे प्रोजेक्ट में अपनी अग्रणी भूमिका का निर्वाह करते हुए खेत-खेत में नर्मदा का पानी पहुंचाने का भागीरथी प्रयास डॉ. यादव की विकासात्मक सोच को प्रदर्शित करता है।

आईये उज्जैन के विकास की इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित करने में हम भी अपना हाथ बढ़ाएं। उज्जयिनी के विकास की यह कीर्ति विश्वपटल पर इसी तरह फैलती रहे। जय उज्जयिनी युगे, युगे।

सांस्कृतिक सोच के साथ बढ़ता उज्जैन का गौरव

समृद्ध देष वह नहीं जो सिर्फ विकास की राह पर आगे बढ़े, बल्कि समृद्ध देष वह है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी परिपूर्ण हो। विष्व की सबसे प्राचीन संस्कृति के पुरोधा भारतवर्ष के उज्जैन शहर में ऐसी ही धरोहरें इसकी कहानी को बयां करती हैं। मध्यप्रदेष की सांस्कृतिक नगरी उज्जयिनी जिसकी चारां दिषाओं में सनातन संस्कृति की धर्म ध्वजा लहराती है। जिसकी हवा में हिंदू संस्कृति की सौंधी-सौंधी खुष्बू आती है। उसका धार्मिक वैभव आज भी मूल स्वरुप में सुषोभित होता है। ऐसे उज्जैन शहर के सांस्कृतिक स्थलों के विकास और जीर्णोद्धार के साथ विधायक मोहन यादव युवाओं, बच्चों और नागरिकों में सांस्कृतिक क्रांति लाने का प्रेरक कार्य कर रहे हैं।

डॉक्टर मोहन यादव पुरातन शहर उज्जैन की जड़ों में समाहित विक्रमादित्य के नौ रत्नों के सांस्कृतिक मूल्यों को सींचते हुए पुष्पित और पल्लवित कर रहे हैं। संस्कृति के उत्थान का यह सिलसिला विधायक डॉक्टर मोहन यादव की सोच का ही परिणाम है। विक्रमोत्सव, महानाट्य विक्रमादित्य, राजाभोज नाट्य मंचन जैसे आयोजनों से युवा पीढ़ी की आंखों में धार्मिक इतिहास जीवंत हो उठता है।

उज्जैन के खेल प्रशाल, कार्तिक मेला ग्राउंड, शास्त्री नगर मैदान, जाल बोर्डिंग ग्राउंड में प्रदर्शित यह महानाट्य उज्जैन के बाहर इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों में उज्जैन की सांस्कृतिक पताका फैला चुका है।
300 कलाकारों, हाथी-घोड़ा, पालकी, भव्य सेट, आकर्षक आतिशबाजी, रंग बिरंगी विद्युत सज्जा से सुशोभित इस महानाट्य में स्वयं डॉक्टर मोहन यादव ने अभिनय कर यहां के कलाकारों को प्रोत्साहित किया है।

कृष्ण के इतिहास की गौरवगाथा, त्रिवेणी संग्रहालय, कोठी पैलेस पर संचालित ‘लाइट एंड साउंड शो‘, जैन म्यूजियम लाईट एंड साउंड शो के माध्यम से संस्कारों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।

सिंहस्थ 2016 के आमंत्रण पर तैयार सिंहस्थनाद नाट्य को मध्यप्रदेश के कई जिलों सहित विधानसभा के मुख्य हॉल में भी प्रदर्शित करवाने का श्रेय डॉक्टर मोहन यादव को जाता है।

विक्रमादित्य के न्याय और कीर्ति को जन-जन के बीच पहुंचाने का ध्येय लेकर डॉक्टर यादव के मार्गदर्षन में ‘विक्रमादित्य शोधपीठ संस्थान‘ अग्रसर है। तो वहीं विक्रमादित्य पर लिखी गई पुस्तकां में उज्जैन की गौरवांवित कर देने वाली ऐतिहासिक जानकारी का दर्षन हमें यहां होता है।

समय-समय पर नुक्कड़ नाटक, मालवी लोकगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन कर ग्रामीणों के लोकगायिकी और लोकगीतों को सहेजने का अनुपम कार्य डॉक्टर मोहन यादव ने किया है। शोध संगोष्ठी से साहित्यिक और पुरातात्विक उज्जयिनी के महत्व को प्रतिपादित करने की चेष्टा अनवरत जारी है।

वेद श्लोक प्रतियोगिता के माध्यम से संस्कृति को कायम रखते हुए संस्कार प्रेषित करने का अनुपम कार्य डॉक्टर यादव द्वारा किया गया है। तो इसके अलावा कभी गरबा उत्सव के पांडालों में नृत्य कला को प्रोत्साहन दिया, तो कभी संगीत प्रतियोगिताओं के माध्यम से उदित मान कलाकारों को मंच देने का कार्य भी विधायक डॉक्टर मोहन यादव बखूबी कर रहे हैं।

प्राचीन कालीन सिक्कों को जब हम देखते हैं तो हमारी आंखे एकाएक उस ऐतिहासिक काल के दर्षन करने पहुंच जाती है, और यह पहल है डॉक्टर यादव की। हिंदू धर्म के एकीकार के लिए विक्रम नव वर्ष प्रतिपदा का भव्य आयोजन उज्जैन की सांस्कृतिक चमक को निखार रहा है। विक्रमोत्सव के अंतर्गत विक्रमादित्य संगीत अलंकरण समारोह आज देष का एक प्रतिष्ठित सम्मान है। जिसमें भारतवर्ष की कई शख्सीयतों को सम्मान देकर विक्रमादित्य युगीन उस परंपरा को अबाध रखने का कार्य भी डॉक्टर मोहन यादव कर रहे हैं।

क्षिप्रा के रामघाट पर देश के जाने माने संगीत पुरोध अपनी स्वर लहरियां बिखेर चुके हैं। जिसमें प्रमुख हैं रविंद्र जैन, सुरेश वाडकर, ए. हरिहरन, उदित नारायण, अल्का याग्निक, अनुराधा पौडवाल, कविता कृष्णमूर्ति, सुदेश भौसले, अभिजीत भट्टाचार्य, जसविंदर नरुला, जैसे तमाम बड़े कलाकार।

सांस्कृतिक झलकियों का आनंद निर्बाध रुप से उज्जैनवासियों को मिलता रहे इसके लिए कालिदास अकादमी में संकुल ऑडिटोरियम का निर्माण करवाया तो वहीं जीर्णक्षीर्ण पड़े विक्रम कीर्ति मंदिर ऑडिटोरियम का जीर्णोद्धार करवाकर आधुनिक कलेवर में प्रस्तुत कर कलाकारों को एक अनुपम सौगात देने का कार्य विधायक डॉक्टर मोहन यादव ने किया है। इसी परिसर में ओपन ऑडिटोरियम का निर्माण भी यहां के कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण उपहार डॉ. मोहन यादव की ओर से मिला है। धर्म नगरी उज्जयिनी आज अपने इतिहास के दर्षन जो हमें करवाती है, उसके पीछे डॉक्टर मोहन यादव की एक बड़ी और उर्जावान सोच है। सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से उज्जयिनी के इतिहास को विश्वपटल पर लाने की अनुपम पहल से डॉक्टर मोहन यादव ना केवल कला संस्कृति का संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि अपनी गौरवशाली संस्कृति से आमजन का परिचय भी करवा रहे हैं।

सांस्कृतिक गतिविधियां और साहित्य का यह प्रवाह इसी तरह निरंतर उज्जैन में निर्बाध रुप से बहता रहे, यही डॉक्टर मोहन यादव का ध्येय है।